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पत्रकार जगत के पुरोधा थे स्व बाबू बालेश्वर लाल 27 मई को उनकी पुण्यतिथि पर पत्रकारों ने अर्पित की श्रद्धांजलि

पत्रकार जगत के पुरोधा थे स्व बाबू बालेश्वर लाल 27 मई को उनकी पुण्यतिथि पर पत्रकारों ने अर्पित की श्रद्धांजलि पत्रकारों के हितों के लिए आखरी दम तक किया संघर्ष हरिद्वार (उत्तराखंड)। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के संस्थापक स्व० बाबू बालेश्वर लाल की पुण्यतिथि पर पत्रकारों ने उनको श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार चौधरी ने कहा कि बाबू बालेश्वर लाल ने पत्रकार जगत में बतौर संस्थापक ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की नींव रखी थी। उन्होंने अंतिम दिनों तक पत्रकार हितों के लिए संघर्ष किया। उनका जन्म एक सम्भ्रान्त कायस्थ परिवार में ग्राम रतसर जिला बलिया उत्तर प्रदेश में दिनाँक 1 जनवरी 1930 को हुआ। उन्होंने एम० ए० राजनीतिक शास्त्र काशी हिन्दू विश्व विद्यालय वाराणसी एवं महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ वाराणसी से इतिहास में एम०ए० किया। जंगली बाबा इंटर कालेज गढ़वार बलिया में प्रवक्ता रहे। बालेश्वर जी ने शिक्षा प्रदान करवाने के साथ ही पत्रकार के रूप में आजीवन दैनिक जनवर्ता, दैनिक स्वतंत्र भारत में संवाददाता के रूप में सेवाएं देते रहे। ग्रामीण पत्रकार की अपनी पहचान हो, वह लावारिस न घोषित हो के उद्देश्य को लेकर 8 अगस्त 1982 को उत्तर प्रदेश के ग्राम गढ़वार जिला बलिया उतर प्रदेश में महज 7 सदस्यों के साथ हो ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की नींव रखी थी। इसकी पहली प्रान्तीय बैठक 21 नवम्बर 1985 को लखनऊ में हुई, जिस बैठक में सर्व सम्मति से उन्हें अध्यक्ष बनाया गया। बाबू बालेश्वर लाल जी के सानिध्य में सॅगठन का पहला प्राॅतीय सम्मेलन फरवरी 1987 ई० में श्री गंगा प्रसाद मैमोरियल हॉल अमीनाबाद लखनऊ में सॅंपन्न हुआ। इस प्रथम सम्मेलन का संचालन भी संस्थापक सदस्य देवी प्रसाद गुप्ता (वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष) के द्वारा सुव्यवस्थित उद्घोषणाओं के बीच अनेक विचारों के बीच सम्पन्न हुआ था। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के संस्थापक बाबू बालेश्वर लाल जी के सानिध्य से हमें 27 मई 1987 को बंचित होना पड़ा। उसके बाद प्रयागराज में ग्रापए के राष्ट्रीय स्वरूप की कल्पना करते हुए देवी प्रसाद गुप्ता को राष्ट्रीय संयोजक की कमान सौंपी गई है। गुप्ता जी के सानिध्य में संगठन नई ऊंचाईयों को छू रहा है। वर्तमान में उतर प्रदेश, दिल्ली के अलावा उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र, विहार, पश्चिम बंगाल के प्रदेश प्रभारी व प्रदेश संयोजक सशक्त रूप से ग्रापए के विस्तार में प्रयासरत हैं। संगठन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों की पहचान कायम रखने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना,विभिन्न राज्य सरकारों से उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करना, पत्रकारों के स्वाभिमान की रक्षा करना एवं किसी भी अपेक्षा पूर्ण स्थिति में या उत्पीड़न की स्थिति में प्रभावित पत्रकार के साथ खड़े होकर उसे न्याय दिलाना है। इन्हीं उद्देश्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह संगठन राष्ट्रीय स्तर पर सतत् प्रत्याशील है एवं ""पत्रकार आयोग"" के गठन की मांग करता है। जैसा कि सर्व विदित है भारत दुनिया का सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश कहा जाता है, जिसका चौथ महत्वपूर्ण स्तंभ पत्रकारिता है। हम भारत का हृदय कहे जाने वाले ग्रामीण क्षेत्र के ही महत्वपूर्ण स्तंभ की एक इकाई है। हम सभी पत्रकार एक साथ मिलकर ग्रामीण पत्रकार ऐसोसिएशन को और अधिक सक्रिय व सशक्त बनाने की दिशा में कदम से कदम मिलाकर निरंतर आगे बढ़ें ताकि हमारी सामूहिक शक्ति किसी भी अन्य अनित एवं उपेक्षा का प्रबल प्रतिरोध करने में सक्षम हो सके। आज 27 मई ग्रापए के संस्थापक बाबू बालेश्वर लाल की पुण्यतिथि पर हम उन्हें विनम्र श्रृद्धांजलि अर्पित करते हैं। कार्यक्रम में पत्रकार रामकुमार चौहान, नीटू कुमार, आदित्य चौधरी, नवनीत परमार, अनिल कुमार, खुशी गुर्जर, शकील, सतीश नेगी व रोहित राणा आदि ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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